Monday, 11 February 2013

सरस माधुरी




"वृन्दावन कलानाथौ हृदयानन्द वर्द्धनौ। 
सुखदौ राधिका कृष्णौ भजेsहं कुञ्ज गामिनौ।।"

ठाकुरजी श्रीसरसबिहारी लाल जी सरकार )
नैनन कौ लाठौ लीजिये। 
गोरी    श्याम    सलौनी    जोरी    सरस    माधुरी    पीजिये   ।।
छिन-छिन प्रति प्रमुदित चित चावही निज भावहि में भीजिये।
श्रीहरिप्रिया  निरखि  तन  मन  धन  लै  न्यौछावरि  कीजिये ।।
(महावाणीजी सेवा सुख पद 42)